Wednesday, 17 June 2015




                                         



बॉलीवुड के बादल छाये, बदलावों की बारिश है,
ये है सिर्फ सिनेमा या फिर सोची समझी साजिश है,
याद करो आशा पारिख के सर पे पल्लू रहता था,
हीरो मर्यादा में रहकर प्यार मोहब्बत करता था
प्रणय दृश्य दो फूलों के टकराने में हो जाता था,
नीरज, साहिर के गीतों पर पावन प्रेम लजाता था,
लेकिन अब तो बेशर्मी के घूँट सभी को पीने हैं,
जांघो तक सुन्दरता सिमटी, खुले हुए अब सीने हैं,
नयी पीढियां कामुकता के घृणित भाव की प्यासी हैं,
कन्यायें तक छोटे छोटे परिधानों की दासी हैं,
क्या तुमको ये सब विकास का ही परिचायक लगता है,
हनी सिंह भी क्या समाज का शीर्ष सुधारक लगता है?
क्या तुमको पश्चिम के ये षडयंत्र समझ में आते हैं?
क्या शराब की कंपनियों के लक्ष्य नही दिखलाते हैं?
लल्ला लल्ला लोरी वाली लोरी भी बदनाम हुयी,
और कटोरी दूध भरी अब दारू वाला जाम हुयी,
बोतल एक वोदका पीना काम हुआ है डेली का,
वाइन विद आइस नारा है पीढ़ी नयी नवेली का,
राष्ट्र प्रेम की फिल्मे देखों औंधे मूह गिर जाती हैं,
पीकू पीके कचड़ा करके रुपये करोडों पाती हैं,
खुदा-इबादत-अल्लाह-रब ही गीतों में अब छाये हैं,
सेक्सी राधा डांस फ्लोर तक देखो ये लाये हैं,
निज परम्परा धर्म और संस्कारों पर आघात है ये,
जिसे सिनेमा कहते हो इक जहरीली बरसात है ये,
कर्मा, बॉर्डर, क्रांति, सरीखा दौर पुनः लौटाओ जी,
या फिर चुल्लू भर पानी में डूब कहीं मर जाओ जी,

Tuesday, 16 June 2015



गुलाम
सिकंदर महान ने अपने रण कौशल से ग्रीस, इजिप्ट समेत उत्तर भारत तक अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। सालों से युद्ध करती सिकंदर की सेना बहुत थक चुकी थी और अब वो अपने परिवारों के पास वापस लौटना चाहती थी। सिकंदर को भी अपने सैनिकों की इच्छा का सम्मान करना पड़ा और उसने भी भारत से लौटने का मन बना लिया।
पर जाने से पहले वह किसी ज्ञानी व्यक्ति को अपने साथ ले जाना चाहता था। स्थानीय लोगों से पूछने पर उसे एक पहुंचे हुए बाबा के बारे में पता चला जो कुछ दूरी पर स्थित एक नगर में रहते थे।
सिकंदर दल-बल के साथ वहां पहुंचा। बाबा निःवस्त्र एक पेड़ के नीचे ध्यान लगा कर बैठे थे। सिकंदर उनके ध्यान से बाहर आने का इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद बाबा ध्यान से बाहर निकले और उनके आँखें खोलते ही सैनिक ” सिकंदर महान – सिकंदर महान ” के नारे लगाने लगे।
बाबा अपने स्थान पर बैठे उन्हें ऐसा करते देख मुस्कुरा रहे थे।
सिकंदर उनके सामने आया और बोला , ” मैं आपको अपने देश ले जाना चाहता हूँ। चलिए हमारे साथ चलने के लिए तैयार हो जाइये। “
बाबा बोले, ” मैं तो यहीं ठीक हूँ , मैं यहाँ से कहीं नहीं जाना चाहता , मैं जो चाहता हूँ सब यहीं उपलब्ध है , तुम्हे जहाँ जाना है जाओ। “
एक मामूली से संत का यह जवाब सुनकर सिकंदर के सैनिक भड़क उठे। भला इतने बड़े राजा को कोई मना कैसे कर सकता था।
सिकंदर ने सैनिकों को शांत करते हुए बाबा से कहा , ” मैं ‘ना’ सुनने का आदि नहीं हूँ , आपको मेरे साथ चलना ही होगा। “
बाबा बिना घबराये बोले , ” यह मेरा जीवन है और मैं ही इसका फैसला कर सकता हूँ कि मुझे कहाँ जाना है और कहाँ नहीं !”
यह सुन सिकंदर गुस्से से लाल हो गया उसने फ़ौरन अपनी तलवार निकाली और बाबा के गले से सटा दी , ” अब क्या बोलते हो , मेरे साथ चलोगे या मौत को गले लगाना चाहोगे ??”
बाबा अब भी शांत थे , ” मैं तो कहीं नहीं जा रहा , अगर तुम मुझे मारना चाहते हो तो मार दो , पर आज के बाद से कभी अपने नाम के साथ “महान” शब्द का प्रयोग मत करना , क्योंकि तुम्हारे अंदर महान होने जैसी कोई बात नहीं है … तुम तो मेरे गुलाम के भी गुलाम हो !!”
सिकंदर अब और भी क्रोधित हो उठा, भला दुनिया जीतने वाले इतने बड़े योद्धा को एक निर्बल – निःवस्त्र , व्यक्ति अपने गुलाम का भी गुलाम कैसे कह सकता था।
” तुम्हारा मतलब क्या है ?”, सिकंदर क्रोधित होते हुए बोला।
बाबा बोले, ” क्रोध मेरा गुलाम है , मैं जब तक नहीं चाहता मुझे क्रोध नहीं आता , लेकिन तुम अपने क्रोध के गुलाम हो , तुमने बहुत से योद्धाओं को पराजित किया पर अपने क्रोध से नहीं जीत पाये , वो जब चाहता है तुम्हारे ऊपर सवार हो जाता है, तो बताओ…हुए ना तुम मेरे गुलाम के गुलाम। “
सिकंदर बाबा की बातें सुनकर स्तब्ध रह गया। वह उनके सामने नतमस्तक हो गया और अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया।

Shikher Won the Prize in tie tieing compitetion.






प्रतिष्ठा का उच्च सोपान
किसी ढाँचे में अपने को ढालने के लिए आस- पास का वातावरण भी वैसा ही बनाना पड़ता है। परिस्थितियों का अप्रत्यक्ष रूप से विशेष प्रभाव पड़ता है कई व्यक्ति अच्छे विचार तो रखते हैं, पर आस- पास की बुरी परिस्थितियों को नहीं बदलते। फलतः ऐसे अवसर आ जाते हैं, जब कि उनके कार्य भी बुरे ही होने लगते हैं। अतऐव अपने दैनिक कार्यक्रम में से उन बातों को चुन- चुनकर निकाल देना चाहिए जिनके कारण आवांछनीय परिणाम उत्पन्न होने की आशंका हो। इस संशोधन में जितनी सूक्ष्म वृद्धि से काम लेंगे, उतनी ही अधिक सफलता होगी। छोटे- छोटे रोडे़ जो नित्य के अभ्यास में आ जाने के कारण कुछ बहुत बुरे नहीं मालूम पड़ते, किसी दिन दुखदायी घटना उपस्थित कर सकते हैं, इसलिए उन्हें पहनने और हटाने में ढील न करनी चाहिए। रेल की पटरी पर रखा हुआ एक छोटा सा पत्थर का टुकडा़, समूची रेल को उलट देने का कारण हो सकता है, इसी प्रकार छोटे- छोटे अनुचित प्रसंग किसी दिन आत्म सम्मान के घोर घातक प्रमाणित हो सकते हैं
मजाक के तौर पर बहुत से आदमी अश्लील शब्दों का उच्चारण करते हैं। ऐसा वे कौतूहल के लिए हलके तौर पर करते हैं, कोई विशेष स्वार्थ उनका नहीं होता पर कौतूहल ही कौतूहल में कुवचन बोलने की आदत पड़ जाती है और वह आदत किसी अपरिचित व्यक्ति के सामने अनायास ही प्रकट हो तो यह तो यह अपने मन में बहुत शीघ्र यह विश्वास जमा लेगा कि यह टुच्चा आदमी है। बेहूदे तरीके से बात करना, अकारण बेतरह दांत फाड़ना, विचित्र भाव भंगी बनाते रहना, निकृष्ट प्रसंगों को वार्तालाप का विषय बनाना, इस तरह के काम यद्यपि पापयुक्त होते हुए भी दूसरों पर यह प्रकट करते हैं कि यह आदमी हलके मिजाज का, उथला, असंस्कृत, गँवार या लुच्चा है। लोगों का इस तरह का स्वभाव अपने बारे में अकारण बने, यह कोई अच्छी बात नहीं है। आपकी मुख- मुद्रा गम्भीर रहनी चाहिए। हँसना मुस्कराना, प्रसन्न रहना एक कला है, यह एक आवश्यक गुण है, इस प्रकार बरता जाना चाहिए कि दुर्गुण न बन जाय। प्रसन्न रहने की आदत के साथ गम्भीरता, सौम्यता, तेजस्विता भी रहनी चाहिए। मुख- मुद्रा में गौरव और बड़प्पन की रेखायें भी नियोजित होनी चाहिए।

प्रतिष्ठा का उच्च सोपान 

Thursday, 9 October 2014

 Adjective (Visheshan)

Visheshan (विशेषण) or adjective is an essential element of a sentence. It expresses the quality of a person or thing. In Hindi grammar, visheshan or adjective is used to explain noun including person, place or thing in a better way. Hindi adjective or visheshan is used before the noun or the pronoun in the sentence. There are four types of adjective or visheshan in Hindi grammar.

Types of Adjective in Hindi:


1. Gunavachak visheshan (गुणवाचक विशेषण) (Descriptive Adjective/ Adjective of Quality)
2. Parimanvachak visheshan (परिमाण वाचक विशेषण) (Adjective of Quantity)
3. Sankhyavachak visheshan (संख्या वाचक विशेषण) (Numeric Adjective)
4. Sarvanmic visheshan (सार्वनामिक विशेषण) (Demonstrative Adjective)


Sentences using Visheshan are mentioned below: 

1. सीमा एक सुन्दर लड़की है।  (Seema ek sundar ladki hai.)
2. नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रपति थे।  (Nelson Mandela dakshin Africa ke prasid swatantrata senani evam rashtrapati the.)
3. रमेश एक चतुर लड़का है।  (Ramesh ek chatur ladka hai.)



   

सर्वनाम : अभ्यास 1

  1. नीचे दिए वाक्यों में सही सर्वनाम छाँट कर भरिए:
    तुमवहउसकेउन्हेंतुम्हारेहम
    1. राम, ___________ हैदराबाद से होते हुए दिल्ली जाएँगे।
    2. सुना है, ___________ भाई की अच्छी कम्पनी में नौकरी लग गई है।
    3. ___________ गणित और विज्ञान पढ़ने में होशियार है।
    4. ___________ और ___________ दोस्त बहुत शोर मचाते हैं।
    5. डाक्टर नें ___________ अस्पताल से छुट्टी दे दी है।
  2. नीचे दिए गए फूल की पंखुड़ियों में सर्वनाम के भेदों के नाम लिखिए:
  3. नीचे लिखी कहानी में सर्वनाम शब्दों में रंग भरिए:
    एक साधू-बाबा जंगल में तपस्या करते थे। एक दिन उन्हें बिल्ली का एक छोटा-सा बच्चा दिखाई दिया। उसके पैर से बहुत खून बह रहा था। उन्होंने इधर-उधर देखा, जब कोई और नजर नहीं आया तो उन्होंने बिल्ली के बच्चे को प्यार से उठाया और उसकी मरहम-पट्टी की। अब उसे देने के लिए उनके पास दूध न था, तो वे गाँव की ओर चल दिए। गाँव वालों ने उनका आदर-सत्कार किया और एक गाय उपहार में दी। साधू-बाबा बिल्ली के बच्चे और गाय को ले कर अपनी कुटिया में आ गए। अब वे उन दोनों पशुओं की सेवा और भगवान की आराधना में अपना दिन बिताने लगे।
  4. निम्नलिखित शब्दों में जो शब्द सर्वनाम नहीं हैं उन पर गोला लगाइए:
    1. आप, तभी, वह, यह, कोई
    2. तुम, तथा, तुम्हारा, उस
    3. मैं, ताकि, मेरा, अपने
    4. उनसे, उन्हें, उस, उधर
    5. हमारा, आज, उनका, सबका

Sunday, 5 October 2014


             
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कक्षा २




   पाठ ८   ९   की दो पेज सुलेख करिए। उसमें से संज्ञा शब्द चुनकर उन्हें रंगीन पेंसिल से रेखांकित करिए।
     
कक्षा ३

  पाठ ८   ९   की दो पेज सुलेख करिए। उसमें से सर्वनाम शब्द चुनकर उन्हें रंगीन पेंसिल से रेखांकित करिए।